Tuesday, January 25, 2011

मै क्या हूँ आज बताऊंगा तुझे,
तू जो पूछेगी सब कुछ बताऊंगा तुझे

एक वक़्त जो बीतता नही ,
एक जिन्दगी जो चलती नही,
एक साँस जो थमती नही,
एक प्यास जो बुझती नही,
आज हर एक राज बताऊंगा तुझे,



एक खुली किताब कुछ कोरे पन्ने
एक उनकही बात,
एक नाकाम कोशिश ,
इसका राज बताऊंगा तुझे ,




एक अनछुआ सौन्दर्य ,
एक ग्रीष्म का सावन ,
एक हकीक़त ,
"मृगमरीचिका "
क्या हूँ आज बताऊंगा तुझे ।




आखों में नमी
भीगे लब
कापते होठ,
सिहरता बदन ,
एक अनसुलझी सोच ,

तू मेरी कौन ???ये बताऊंगा तुझे .................
गर जिन्दगी मिली तो एक सवाल पूछेंगे ...
क्या है खुद का इलाज पूछेंगे
पर तुम तो शुरु ही होती हो हिज्र के साथ ......
तुमसे क्या गिला .....तुम से क्या पूछेंगे ......................
किधर जाऊं कुछ समझ आता नहीं
इधर मै हूँ ,उधर निगाहे है
जिन्दगी शुरु होती है मेरे आखों से,
खत्म होती है,उसकी निगाहों तक ...................
जिन्दगी मिली तो एक सवाल पूछेंगे ,
क्या है खुद का इलाज पूछेंगे ,
जिसे मै खोजा करता हूँ
हर वक़्त ,हर जगह ,
उसका पता और उसका नाम पूछेंगे ,
क्यू चलती है ये साँस ,?
और किस पे है ये इल्जाम पूछेंगे,
दर्द क्यू होता है हर वक़्त मुझे ,
इसका कारन और दवा का नाम पूछेंगे
तू परेशान न हो .........एक वादा रहा तुझ से ,
जब मिलोगे ......
तुझसे न एक भी सवाल पूछेंगे .............
तेरे आखों में नमी
गुमसुम जिन्दगी
सुनी सांसे
लड़खड़ाते कदम
कापते हाथ
टूटती जिन्दगी
तू कौन??
मेरी बंदगी
न हो उदास
आएगा सावन
हसेंगे बदल
तुझे हँसता देख
बरसेंगे बादल
तुझे गाता देख
नमी तेरे आखों में अच्छी नहीं
इसे मेरे दिल में रहने दो
सुनी सांसे अच्छी नही
सूनापन मेरे मन में रहने दो ................