Monday, January 18, 2010

nam aakhen aur udas man.........................

नम आखें ...
उदास मन ...
उदास चेहरा ....
पर
मुस्कुराना पड़ा ...

सिसकती आत्मा ...
व्याकुल मन ..
तड़पती इच्छा....
पर
खुद को मानना पड़ा .....
वो आया पर कुछ कह सके ...
उसकी एक छुवन बिन रह सके ...
सोचते रहे नाराज़ रहेंगे हम भी ....
पर
उसकी अदा देख हसना पड़ा
अब
खुश हूँ , सांत हूँ इछित हूँ ...
पूरी होगी हर सोच हर इच्छा ये जन कर हर्स्षित हूँ ....
अब नहीं है नाम आखें ,...
नाही उदास चेहरा .....
और
खुश होके मुस्कुराना पड़ा ..................................................
प्रशांत श्रीवास्तव

No comments:

Post a Comment